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निजी स्कूलों की मनमानी पर लगे रोक , अभिभावक हो रहे हैं निजी स्कूलों में किताबों के नाम पर हो रही ठगी का शिकार :- पत्रकार दीवान सिंह सिकरवार(मीडिया प्रभारी आगरा जनपद भा. कि म. यू. धीरज)
आगरा:- शिक्षा एक जड़ है बच्चों के भविष्य की मंजिल तैयार करने की लेकिन देश में शिक्षा व्यवस्था पर नजर डाली जाए तो शिक्षा ने नाम पर सिर्फ लूट हो रही है ऐसे में शिक्षा विभाग चुप क्यों है अप्रैल माह से निजी स्कूलों में नई प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है निजी स्कूलों में देखा जा सकता है कि कक्षा एक का पाठ्यक्रम लगभग ₹2500/- का कक्षा पांच का पाठ्यक्रम लगभग ₹6000/- का और कक्षा आठ का पाठ्यक्रम लगभग ₹7000/- का है ऐसे में स्कूलों ने अभिभावकों पर किसी एक निश्चित दुकान पर अपना व्यापार खोला है जिसमें सभी कक्षाओं की किताबों और कोंपियों का एक सेट तैयार करके रखवा दिया है अभिभावक जाएं और एक निश्चित तय राशि देकर अपना सेट खरीदकर ले जाएं जिसमें नोटबुकों की बात करें तो वही नोटबुक अन्य दुकान पर 60 से 70 रुपए में मिल जाती है उसे निजी स्कूलों की निश्चित दुकान 180 रुपए में दे रही है कक्षा छठवीं के पाठ्यक्रम के साथ जो कॉपियां दी जा रही है उनका मूल्य निजी दुकान पर लगभग ₹2400/- है वहीं किसी अन्य दुकान पर उसे खरीदा जाए तो वही नोटबुक लगभग ₹650 रुपए की है इसका जीता जागता उदाहरण है कई अभिभावक जिनसे हमारी बात हुई निजी दुकान वालों से अगर बात की जाए की कुछ मूल्य कम कर लिया जाए तो निजी दुकान वालों का कहना रहता है कि मूल्य कम नहीं कर सकते है स्कूल वालों से बात करो अगर बच्चे पढ़ाने है तो खर्च करना पड़ेगा अब बात ये जाननी है कि निजी दुकानें अपना सामान बेचने के लिए स्कूल वालों से बात करने को कहते है इसके अलावा ये किताबें किसी अन्य दुकान पर नहीं मिलेगी तो मजबूरन अभिभावकों को निजी दुकान से लेनी पड़ती है मैं दीवान सिंह सिकरवार (मीडिया प्रभारी, भारतीय किसान मजदूर यूनियन (धीरज) शिक्षा विभाग से अपील करता हूं कि शिक्षा के नाम पर हो रही लूट को बंद किया जाए और शिक्षा को हर वर्ग तक पहुंचने दिए जाए अन्यथा हमारा संगठन अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन करने के लिए तैयारी कर रहा है।
्पत्रकार ब्यूरो चीफ प्रैस रिपोर्टर राजीव सिकरवार वन्दे भारत लाइफ टीवी न्यूज चैनल आगरा उत्तर प्रदेश ्









